Home ज्ञान - विज्ञान आइंस्टीन का दिमाक अब तक क्यों सम्भाल कर रखा गया है ?

आइंस्टीन का दिमाक अब तक क्यों सम्भाल कर रखा गया है ?

लगे हाथ ये भी बता दूँ की आइंस्टीन की आँखें भी सुरक्षित रखी गयीं हैं। पेरिस के मटर म्युसियम में देख सकते हैं।

अल्बर्ट आइंस्टीन का सिर जन्म से ही सामान्य के मुकाबले कुछ बड़ा था। उस समय तक, डाक्टरी विज्ञानं में इतना विकसित नहीं था तो सिर के बड़े होने का कारण पता नहीं चल पाया। वैसे आइंस्टीन को इस वजह से कोई दिक्कत थी भी नहीं।

शायद ही कई लोग जानते होंगे की आइंस्टीन को बचपन में असामान्य बच्चा माना जाता था ठीक वैसे ही जैसा कि हिंदी फिल्म कोइ मिल गया में रितिक रोशन को माना जाता था। आइंस्टीन एक बहुत ही शर्मीले बच्चे थे और चार साल की उम्र तक एक शब्द भी बोलना नहीं शुरू किया था। आइंस्टीन ने नौ साल की उम्र में पहली बार बोलना स्पष्ट रूप से बोलना शुरू किया। इसके पीछे भी बड़ी दिलचस्प कहानी है, खैर वो किसी और सवाल में चर्चा करेंगे या कोशिश करूँगा की कमेंट में लिख दूँ।

अब सवाल पर लौटते हैं।

ये तो जग जाहिर है की आइंस्टीन को बचपन से ही नालायक विद्यार्थियों से गिना जाता था। खासकर आइंस्टीन के शिक्षक उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वे गणित और विज्ञान के अलावा हर विषय में फेल हो जाते थे। दुनिया के तमाम विद्यार्थियों की तरह आइंस्टीन पर भी शिक्षक की डांट का कोई असर नहीं होता था।

आइंस्टीन की मृत्यु के बाद, पैथोलॉजिस्ट डॉ। थॉमस स्टोल्ट्ज हार्वे ने आइंस्टीन के परिवार की आज्ञा के अपनी अल्बर्ट आइंस्टीन के खोपड़ी से दिमाग चुरा लिया (उस समय अविश्वसनीय था)

इस बात के लिए हॉस्पिटल वालों ने भी थॉमस से दिमाग लौटने के लिए आग्रह किया लेंकिन थॉमस ने इंकार कर दिया और लगभग 20 वर्षो तक दिमाग को छुपा कर रखा। बीस वर्षो बाद हंस अल्बर्ट (आइंस्टीन के बेटे) के अनुमति लेने के बाद दिमाग पर परीक्षण शुरू किया। लेकिन थॉमस में इतनी छमता नहीं थी की दिमाग अच्छे से पढ़ पते तो उन्होंने दिमाग के 200 टुकड़े किये और और अलग अलग साथी डॉक्टरों को भेजा। अध्यन के बाद जो नतीजे आये वो काफी चौका देने वाले थे।

पैथोलॉजिस्ट डॉ थॉमस को इस पागलपन के लिए अस्पताल से भी निकाल दिया गया। लेकिन डॉक्टर थॉमस का प्रयास व्यर्थ नहीं गया। इस हरकत का एक शानदार नतीजा ये निकला की दिमाग की पढाई के बाद चौका देने वाला नतीजा ये सामने आया की आइंस्टीन के दिमाग में साधारण लोगों की तुलना में एक असाधारण कोशिका संरचना थी। ये आम इंसान के मुकाबले काफी बड़ी थी।

मुटर संग्रहालय Mutar Museum (फिलाडेल्फिया में संग्रहालय) दुनिया का एकमात्र स्थान जहां आप अल्बर्ट आइंस्टीन के मस्तिष्क के टुकड़े देख सकते हैं। मस्तिष्क अनुभाग, 20 माइक्रोन मोटी और कैसाइल वायलेट के साथ सना हुआ है, मुख्य संग्रहालय गैलरी में प्रदर्शन पर ग्लास स्लाइड में संरक्षित है।

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